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| 01.16.2009 |
| बंदा था मैं खुदा का कवि कुलवंत सिंह |
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बंदा था मैं खुदा का, आदिम मुझे बनाया,
इंसानियत ने मेरी मुजरिम मुझे बनाया । माँगी सदा दुआ है, दुश्मन को भी खुशी दे, हैवानियत दिखा के ज़ालिम मुझे बनाया । दिल में जिसे बसाया, की प्यार से ही सेवा, झाँका जो उसके अंदर, खादिम मुझे बनाया । है शर्मनाक हरकत अपनों से की जो उसने, कैसे बयां करूँ मैं, नादिम मुझे बनाया । रब ने मुझे सिखाया सबको गले लगाना, सच को सदा जिताऊँ हातिम मुझे बनाया । |
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