कवि कुलवंत सिंह


कविता

अच्छाई और बुराई
अभिलाषा
आओ दीप जलाएँ
इस गँवार को !
क्रंदन (एक अधूरा गीत)
कवि अपना कर्तव्य निभा तूँ
कौन
झंकृत
तुम पास तो आओ
दोहे - धरम के
नीलकण्ठ तो मैं नहीं हूँ 
प्रभात
प्रभु
प्रियतम
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
माँ शारदा की वंदना
मुसाफ़िर
यौवन
वीरों का कर्तव्य
वेदना
होली आयी रे!
होली के रंग
दीवान

इतना भी ज़ब्त मत कर
खेल कुर्सी का है यार यह
चुभा काँटा चमन का
जब से गई है माँ ...
तप कर गमों की आग में
दावत बुला के धोखे से
दीन दुनिया धर्म का ..
बंदा था मैं खुदा का
भरम पाला था मैंने
लबों पे
शैदाई समझ कर जिसे ...
सज़ा-ए-मौत दो