अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
09.06.2016


बाँग और आरती
मूल कवि : उत्तम कांबळे
डॉ. कोल्हारे दत्ता रत्नाकर

बाँग, घंटानाद और आरती सुनकर
पहले मनुष्य जाग जाता था
आज दंगा हो जाता है
और प्रार्थना स्थलों को ही
रक्तस्नान कराता है


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें