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ISSN 2292-9754

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09.06.2016


अनुकरण
मूल कवि : उत्तम कांबळे
डॉ. कोल्हारे दत्ता रत्नाकर

मनुष्य संगणक से पूछता है...
"हे संगणक!
तू एक ही समय में
विचारों से लेकर विकारों तक
सेक्स से लेकर अध्यात्म तक
संस्कृति से लेकर विकृति तक
सभी बातें
एक ही पेट में कैसे रख सकते हो?"
संगणक बोला,
"मैं तो बस तुम्हारा ही अनुकरण करता हूँ।"


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