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ISSN 2292-9754

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09.29.2014


स्मृति

दूर......खेत में,
बौरा गई आम की डार,

वर्षों बाद,
याद आ रहा है...
तुम्हारा वह अकारण रूठ जाना,
स्वप्निल आँखों की झिलमिलाती बूँदें,
चहचहाती चिड़ियों को
बरबस ही कंकर फेंक मारना,
और डूबती साँझ को फिर
जा बैठना
बौराये हुये आम के नीचे।


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