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ISSN 2292-9754

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09.29.2014


शराब

मैंने पढ़ा था –
कितने ख़तरनाक होते होंगे वे लोग
जो रात अकेले में बैठकर पीते हैं।

सो, मैंने सोच लिया –
दिन-दहाड़े, भरी दुपहरी में
पीने वाले
निश्चित ही
सीधे होते होंगे – सरल सच्चे
कम ख़तरनाक –

और फिर
मेरी जिजीविषा भी
सीधी और सच्ची थी
अबोध/ कम ख़तरनाक!!

अच्छा हुआ, कि मेरा भ्रम
शीघ्र ही टूट गया
और मैंने जान लिया कि
पुस्तकीय यथार्थ
सच्चाई से कितना दूर होता है।
आप विश्वास करेंगे?
कि, शराब भी कभी-कभी
व्यक्ति का भ्रम तोड़ती है,
उसे सच्चाई सिखाती है?


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