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ISSN 2292-9754

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09.29.2014


सत्य

हमने सुना था –
जीवन एक समर है
प्रश्नों का भँवर है
लड़ा जाना
और डूबना-उतराना
उसकी नियति है।

हमने देखा –
न वे डूबे-उभरे, न लड़े
फिर भी अजर हैं, अमर हैं
मौत के लिए ज़हर हैं।

हमने जाना –
देखने-सुनने में
वास्तव में फ़र्क होता है
और
अनुभवों का सत्य भी
आदमी देख कर लागू होता है।


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