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ISSN 2292-9754

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10.30.2014


सम्बंध

तुम्हारे सोने की सत्यता
और, मेरे जागने की मिथ्या में
एक सम्बंध है। और
वह सम्बंध एक सपना है।
ऐसा सपना है, जिसे मैं
हर बार, हर रात
नये सिरे से देखता हूँ।

सुबह होते ही
मेरे सोने की सत्यता, और
तुम्हारे जागने की मिथ्या का वह सम्बंध
तुम्हारी अलसायी सी अंगड़ाई के समान
टूट जाता है।
हर सुबह, तुम वही सपना
उसी सिरे से देखती हो, सोचती हो।

ठीक है कि यह विरोधाभास है,
फिर भी उसमें एक सम्बंध तो है, कि
वही एक सपना
हम दोनों
कभी एक सिरे से नहीं देखते हैं।


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