अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.23.2019


यात्रा

सभ्रम के साथ हम साथ यात्रा पर निकले राही हैं

कहीं से गुज़रना और गंतव्य तक पहुँचना
दोनों यात्राएँ अलग-अलग होती हैं
यात्रा में दूरी की जाँच-पड़ताल नहीं की जाती
बस यात्रा की लहरों के
के साथ ताल मिलाया जाता है

जीवन की खुरदुराहट के भीतर
मन की अँगुलियों ने
यात्रा सुखद हो
इसलिए कितने ही रास्ते बनाए
सारे संताप उलीचने की कोशिश की
और यात्रा जारी रखी

न जाने कब से यात्रा चल रही है
हर कोई यात्री है अपने सपनों के साथ
वो कहाँ भस्माभूत होते हैं सिर्फ़ चेहरा बदलते हैं
वक़्त के साथ उनकी यात्रा भी चलती रहती है

सूर्य यात्रा के आधे रस्ते पर
अँधियारा दूर करता आगे बढ़ रहा है,
अँधियारा, सितारों को रास्ता बताने के लिए यात्रा पर है

इश्द़्अ की बिसात पर राँझे कश्ती खे रहे हैं
रात आईने में बदलती है
पर बारिश सबके लिए नहीं होती
चाँद हर यात्रा में बताता है इश्क़ की हक़ीक़तें
तब देह की यात्रा
पाक हो पहुँचती है आत्मा तक

सुदूर सितारों की भट्टी से
धरती पर चली आई धूल की यात्रा
अज्ञात में सिमटी है
मिट्टी की यात्रा उस बूँद के इंतज़ार में है
जो जीवन को आगे बढ़ाएँ।

पुरुष की देह से गुज़री एक बिंदु की यात्रा
स्त्री देह तक आकार अगर ख़त्म हो जाती तो
यात्रा के महत्त्व को कैसे समझते हम

कोई भी यात्रा यूँ ही नहीं होती
प्रशांत नयन से भाद्रपद के चंद्रमा तक
साँस से आस तक।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें