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काश! हमें भी रास आ जाये,
जीवन में खुशियों का चलन।
हमें देख कर भी मुस्कुराये,
झूम झूम कर चलती पवन।
जैसे पंछी सारा दिन
उड़ते रहते और चहचहाते,
वैसे ही किस्मत हो जाये,
हम भी रहें मुस्कुराते,
खुशियाँ पाकर मस्त हो जायें
अश्कों से भरे मेरे नयन॥
हर तरफ़ हरियाली हो,
और बागों में हों फूल खिले,
यूँ ही सदा चलते रहें,
ख़्वाबों के यूँ सिलसिले,
बहारें मेरे आँगन में उतरें
लेकर अपना चुलबुलापन॥
रातों को न तन्हाई हो
फूलों के साथ न काँट हों,
किस्मत ने दुनिया के ग़म,
केवल हमें न बाँटे हों,
कभी दिल को महसूस न हो,
ग़म का साया और काँटों की चुभन॥
काश, हमें भी रास आ जाये,
जीवन में खुशियों का चलन॥
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