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05.15.2014


सिलवटें !!

देखती हूँ सिलवटें ही सिलवटें,
बिछौने पर पड़ी, खुद निकालूँ,
तन की निकालता 'सलाहकार'
मन:स्थिति का, कोई चमत्कार।

धरती पर सिलवट! हाहाकार,
व्योम टिका रहे, खुश बेशुमार।
कैसी भी हों, कहलाए मुसीबत
इन्हें निकालता,'एक मददगार' ।

हवा स्वतंत्र, सहती न सिलवट,
ज़िंदगी अधूरी है! बिना करवट।
यदि जीतना, दुर्गम लक्ष्य चाहो,
साहस से लाँघ लो, हर रुकावट।


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