कविता गुप्ता

कविता
आज के लिए मेरे शब्द !!
आज़ादी की एक और वर्षगाँठ !!
काश!! ऐसा करें
लगता है!!
सिलवटें !!
संस्मरण
पिता जी के हाथ से बर्फी का डिब्बा !!
परिस्थितियों में ऐसा चिराग
हादसा - १
हादसा - 2 अध्जन्मी कंजक का श्राप
हादसा - ३ गुनहगार हूँ या नहीं
हादसा - ४ निर्दोष कंजक की बद्दुआ
हादसा - ५ ऐसे लोग कैसे जीते हैं?
हादसा - ६ सफाई
हादस - ७ एक नया दिल दहला देने वाला अनुभव!!
हादसा - ८ कहीं श्राप तो नहीं???
हादसा - ९ कन्या भारत की मिटटी में दफ़न
हादसा - १० अंतिम निर्णय