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सत्य धर्म का कवच पहन कर
तलवारों से टकराता है।
पहन बसन्ती चोला देखो
चक्रव्यूह में वो जाता है।
मौत धार कर एक अकेला
दे देता है यदि चुनौती।
गणित हो सारा झूठा साबित
कुछ भी कहीं भी हो जाता है।
कहीं कोई फरहाद शिरी का
मोड़ के सरिता लाता है।
सत्य धर्म का कवच पहन कर.........
परिवर्तित जब सब दुविधायें
इक निर्णय में हो जाती हैं।
ज्योतिष की भी सारी घोषणा
झूठी साबित हो जाती है।
एक बराबर सवा लाख के
कब होता है, हो जाता है।
सत्य धर्म का कवच पहन कर.........
प्रचारक जो क्षमा दया का
निर्बल नहीं सबल होता है।
शान्तिदूत पलायनवादी
सपने में भी क्या होता है?
सारथी जिस के रथ को खींचे
पार्थ वही तो कहलाता है।
सत्य धर्म का कवच पहन कर.........
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