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09.09.2007
 
व्योम का तारा
कैलाश भटनागर

कदाचित विधाता के मन में जब उमंग आई कि किस प्रकार से एक से अनेक बनूँ। उस के  मन में अनेक प्रश्न आये होंगे। क्या, कौन, कैसे। पहला प्रश्न होगा क्या करूँ। एक सुन्दर पंचतत्वमयी सृष्टि की रचना करूँ। और फिर उस में करूँ पंचतत्मय प्राणियों  की रचना। प्राणियों  में सब से सुन्दर होगी मानव  सृष्टि की श्रेष्टतम विभूति। उस कलाकार ने अपनी पराशक्ति का विकास अपराशक्ति में किया होगा। तभी उन दोनों के संयोग से हुआ होगा  सृष्टि का निर्माण। सत्य, शिवम, सुन्दरं की  शक्ति धारा सृष्टि के अणु अणु में व्याप्त  हो  गई। जिसे वैज्ञनिकों ने कहा विद्युत धारा, ऊर्जा, संतों ने कहा ज्योति और कलाकारों ने कहा अनन्त धारा की गूँज।

इस प्रकार सुन्दर सृष्टि के नैसर्गिक उपभोग या प्रकृति भोग के लिये मानवीय पुतला गढ़ा जाने लगा। जब पुतला बन कर तैयार हो गया, वह आया इस संसार में। परन्तु, आश्चर्य  यह है  कि वह पुतला रोया क्यों ? क्या वह दिव्य माँ की गोदी से बिछुड़ कर या भौतिक माँ की गोदी माँ आ कर। इस लिये आते समय शिशु की आँखें बन्द थीं। क्षण क्षण बीत चले, सूर्य की रश्मी, सभी का स्पर्श, अग्नि की गर्मी, माटी की सुगंध से शिशु की आँखें खुली।  ममतामयी आँखों ने कहा तू मेरा लाल। शिशु की आँखों ने कहा, "तू मेरी माँ। बस फिर किया था। मेरे तेरे संबंध बनने लगे। शैनै : शैनै : माता पिता के दुलार का समय बीत चला। शिक्षा दीक्षा पा कर व्यक्तित्व बना। सहयोगी मित्र मंडल का साथ बना। 

बचपन बीता। यौवन आया। जाने अनजाने प्रकृति में बसंत छाया। जीवन में जब बसंती प्यार का झोंका आया। उमंग तरंग के क्षणों में एक से अनेक होने की चाह हुई संगी साथी पाने की चाह बढ़ी। अपनी नीड़ बसाने का सुन्दर सपना देखा। जब सपना साकार हुआ। माया, ममता ने डेरा डाला। छिन छिन बढ़ते जीवन में संघर्ष बढ़ा। पग पग अन्र्तद्वन्दों के जन मन धन सब शिथिल हुआ। अकस्मात, जब आई धरा  से  जाने की बेला, मन रोया। आकर्षण रोया। रोया  सम्मोहन बिलख बिलख कर। नाते टूटे, रिश्ते टूटे, बंधन टूटे, छुटी क्षण भंगुर दुनिया। कोई मुझे ने रोक सका। बस मैं  तो अपने घर चला। चला।

शून्य से आई एक आवाज निराली। तुम क्या थे, क्या हो गये आज। मत पूछो इस क्षण भंगुर जीवन की लीला।

मैं हूँ अब माटी का एक कण, समुन्दर का बुदबुदा, वायु का झोंका, उस अमर ज्योति का प्रकाश और बस, क्षण भंगुर जीवन। चिन्तन के कुछ क्षण। व्योम तारा।



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