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02.28.2014


बोलेगा साहित्य मेरा

एकदिन,
दृग-कोष शिथिल पड़ जाएँगे
औ' स्मरणांजलि धूमिल

होँगे हस्त कम्पित
पग-पग विराम होगा।

हूँगा मौन
होगी शिथिल जिह्वा
परन्तु चहुँ ओर गुँजित
शिथिलन रह मौन भी बोलूँगा
बोलेगा साहित्य मेरा।


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