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05.04.2008
 

ट्रैफिक-जाम
कृष्ण कुमार यादव


मुट्ठियाँ ताने चंद लोग
हवाओं में नारेबाजी करते
बड़े-बड़े बैनर और दफ्तियाँ संभाले
पल भर में
पूरा ट्रैफिक जाम कर देते हैं
वे दुहाई देते हैं
जनता के हितों की
आश्वासन देते हैं
एक सुखद भविष्य का
पर नहीं दिखता उन्हें
ट्रैफिक जाम में फँसे लोगों का हित
जिनका आज का भविष्य
शायद यही होगा कि
बच्चों की कक्षायें
छूट गयी होंगी
ऑफिस लेट पहुँचने वालों को
बॉस की डाँट सुननी होगी
कोई मरीज अस्पताल न पहुँचने पर
दम तोड़ रहा होगा
या कोई बेरोज़गार युवा
साक्षात्कार में शामिल न हो पाने पर
अपना सिर पीट रहा होगा।


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