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02.13.2009
 

टूटते परिवार
कृष्ण कुमार यादव


आने वाले दिनों में
नक्कार देगी नयी पीढ़ी
परिवार जैसी संस्था का वजूद
हम दो- हमारे दो
पुराना हो चला ये फार्मूला
अब चाहिए सिर्फ हम दो
वो भी दोनों कमाऊ
फिर
शादी के बन्धन की क्या जरूरत
काफी है लिव-इन-रिलेशनशिप
नहीं पैदा करने जब बच्चे
तो होमोसैक्सुअल और लेस्बियन
होने में हर्ज क्या
सीमित हो जायेगी वंश वृद्धि
कुछ लोगों तक
शहरों की आपा-धापी से दूर
मलिन बस्तियों में पैदा होते बच्चे
सोचेंगे
किसी दिन कोई शहरी बाबू
ले ले गोद उन्हें
और बना दे उस संस्कृति का अंग


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