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सभ्यताओं का संघर्ष
एक सभ्यता और दूसरी सभ्यता
के बीच अन्तर करती
और उनमें एक द्वन्द्व पैदा करती
लेकिन इससे पहले कि
एक सभ्यता विजित होती
उसके द्वारा पल्लवित-पुष्पित
दूसरी सभ्यता भी
सर उठाकर खड़ी हो जाती
अब
वह किसी सभ्यता के
रहमोकरम पर नहीं
खुद को
सभ्यता का मानदंड मानती है
बस
ऐसे ही चलता है
सभ्यताओं का संघर्ष
कोई नहीं सोचता
सभ्यताओं की आड़ में
यह मानवीय संघर्ष है।
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