रंग-बिरंगे गुब्बारे कृष्ण कुमार यादव
कितने सुन्दर गुब्बारे हैं कितने रंग-रंगीले लाल, बैंगनी, हरे, गुलाबी काले, नीले, पीले गुब्बारों की दुनिया होती कितनी न्यारी-निराली रोते चेहरों को हँसा दे और खिला दे लाली बच्चे दौड़ें इसके पीछे होकर खूब दीवाने जो मिल जायें गुब्बारे घूमें सीना ताने।