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05.31.2008
 

रंग-बिरंगे गुब्बारे
कृष्ण कुमार यादव


कितने सुन्दर गुब्बारे हैं
कितने रंग-रंगीले
लाल, बैंगनी, हरे, गुलाबी
काले, नीले, पीले

गुब्बारों की दुनिया होती
कितनी न्यारी-निराली
रोते चेहरों को हँसा दे
और खिला दे लाली

बच्चे दौड़ें इसके पीछे
होकर खूब दीवाने
जो मिल जायें गुब्बारे
घूमें सीना ताने।


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