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07.01.2008
 

नानी का घर
कृष्ण कुमार यादव


गर्मी की छुट्टी आते ही
याद आता नानी का घर
पढ़ने-लिखने की टेंशन
हो गई अब रफूचक्कर

नानी रोज़ सुनाये कहानी
नानी का घर सबसे प्यारा
मम्मी-पापा की न पड़े डाँट
हूँ सबकी आँखों का तारा

झूलें झूला, लुक-छिप खेलें
खायें हम खूब आम रसीले
तालाब में तैर-तैर कर
हो जायें हम पूरे गीले

चलो-चलो मौज मनायें
रोज नया त्यौहार मनायें
आमों की बगिया में हम
मस्ती करें, धमाल मचायें।


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