नानी का घर कृष्ण कुमार यादव
गर्मी की छुट्टी आते ही याद आता नानी का घर पढ़ने-लिखने की टेंशन हो गई अब रफूचक्कर
नानी रोज़ सुनाये कहानी नानी का घर सबसे प्यारा मम्मी-पापा की न पड़े डाँट हूँ सबकी आँखों का तारा
झूलें झूला, लुक-छिप खेलें खायें हम खूब आम रसीले तालाब में तैर-तैर कर हो जायें हम पूरे गीले
चलो-चलो मौज मनायें रोज नया त्यौहार मनायें आमों की बगिया में हम मस्ती करें, धमाल मचायें।