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ISSN 2292-9754

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12.25.2014


नव वर्ष कुण्डलियाँ

1
नए स्वप्न ले नयन में, अधरों पर मुस्कान,
समय-सखा फिर आ गया, पहन नवल परिधान।
पहन नवल परिधान, बजी है शहनाई-सी,
तुहिन आवरण ओढ़, धरा है शरमाई-सी।
किरण-करों से कौन, भला घूँघट पट खोले,
धरा नतमुखी मौन, मुदित है नए स्वप्न ले॥
2
दिल को लगती कह गया, बातें बीता साल,
सीख समय से पाठ कुछ, बनना एक मिसाल।
बनना एक मिसाल, सृजन की हो तैयारी,
करें अमंगल दूर, रहें अरिदल पर भारी।
सरस, सुगन्धित वात, मुदित हो सारी जगती,
मन से मन की बात, करें प्रिय दिल को लगती॥
3
चंदा-सा सूरज हुआ, बदला-बदला रूप,
सज्जन के मन-सी हुई, सुखद सुहानी धूप।
सुखद सुहानी धूप, शीत में लगती प्यारी,
नयन तकें अब राह, भेंट है प्रभु की न्यारी।
तेजोमय का तेज, लगे जब कुछ मंदा-सा,
समझ समय का फेर, न हो सूरज चंदा-सा॥
4
कल सपनों ने नयन से, की कुछ ऐसे बात,
कहते सुनते ही सखी, बीती सारी रात।
बीती सारी रात, सुनी गाथाएँ बीती,
पढ़ा बहुत इतिहास, जंग सब कैसे जीती।
सीख समय से पाठ, रचा सुख किन जतनों ने,
उड़ा दई फिर नींद, नयन से कल सपनों ने॥
5
जागेगा भारत अभी, पूरा है विश्वास,
नित्य सुबह सूरज कहे, रहना नहीं उदास।
रहना नहीं उदास, सृजन की बातें होंगी,
कर में कलम-किताब, सुलभ सौगातें होंगी
करे दीप उजियार, अँधेरा डर भागेगा,
बहुत सो लिया आज, सुनो भारत जागेगा॥
6
बहुरंगी दुनिया भले, रंग भा गए तीन,
बस केसरिया, सित, हरित, रहें वन्दना लीन।
रहें वन्दना लीन, सीख लें उनसे सारी,
ओज, शूरता, त्याग, शान्ति हो सबसे प्यारी।
धरा करे शृंगार, वीर ही रस हो अंगी,
नस-नस में संचार, भले दुनिया बहुरंगी॥
7
बोलें जिनके कर्म ही, ओज भरी आवाज़,
ऐसे दीपित से रतन, जनना जननी आज।
जनना जननी आज, सुता झाँसी की रानी,
वीर शिवा सम पुत्र, भगत से कुछ बलिदानी।
कुछ बिस्मिल, आज़ाद, धर्म से देश न तोलें,
गाँधी और सुभाष, भारती जय-जय बोलें॥
8
लिख देंगे नव गीत हम, भरकर जोश, उमंग,
गूँज उठे हुंकार अब, विजय नाद के संग।
विजय नाद के संग, सहेजें गौरव अपना,
करना है साकार, मात का सुन्दर सपना।
तूफानों का वीर, पलटकर रुख रख देंगे,
स्वर्णमयी तकदीर, वतन की हम लिख देंगे॥


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