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ISSN 2292-9754

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12.25.2014


जनवरी - ताँका

 1
नया सूरज
नया सवेरा लाए
मन मुस्काए
ख़ुशियों की रागनी
ये मन-वीणा गाए।
2
उषा मोहिनी
नभ पथ चली, ले
सोने सी काया
पीछे प्रीत पाहुन
दिवस मुग्ध, आया।
3
भोर है द्वार
गाते पंछी करते
मंगलाचार।
पवन भी मगन
प्रेम वर्षे अपार।
4
झीनी चादर
सिहरा सा सूरज
ढूँढे अलाव।
क्यों हुआ हाल ऐसा
बड़ा खाता था ताव !
5
ठिठुरी धूप
ढूँढे है, कहाँ गया?
सूरज भूप।
भोर ले के आ गई
क्यूँ ये ठंडा सा सूप?
6
तुहिन पुष्प
अम्बर बरसाए
धरा लजाए।
नवोढ़ा, सिमटी-सी,
ज्यों छुपी-छुपी जाए।


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