अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
03.17.2017


कैसी ये तक़दीर

 बित्ते भर का जीवन
कैसी ये तक़दीर

नन्ही-नन्ही हथेली पर
भाग्य की लकीर

छोटी-छोटी ऊँगलियों में
चुभती है हुनर की पीर

बेपरवाह दुनिया में
सब ग़रीब सब अमीर

आख़िर हारी आज़ादी
बँध गई मन में ज़ंजीर

कहाँ कौन देखे दुनिया
मर गए सबके ज़मीर!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें