डॉ. जेन्नी शबनम

कविता
अनुभव
अप्रैल फूल
कैसी ये तक़दीर
कैसी ज़िन्दगी? (10 ताँका)
खिड़की मर गई है
चलो चलते हैं
तुम भी न बस कमाल हो
देर कर दी...
प्रलय...
मानव नाग...