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ISSN 2292-9754

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03.17.2017


अप्रैल फूल

आईने के सामने
रह गई मैं भौंचक खड़ी
उस पार खड़ा वक़्त
ठठाकर हँस पड़ा
बेहयाई से बोला -
तू आज ही नहीं बनी फूल
उम्र के गुज़रे तमाम पलों में
तुम्हें बनाया है
अप्रैल फूल!


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