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ISSN 2292-9754

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01.14.2016


याद

 याद - एक गाँव है
पुरखे, रिश्ते-नाते, संगी-साथी हँसते-गाते
भरी दोपहरी में महुए की छाँव है
याद - एक नदिया है
नाव, घाट, मछुआरे, धवल धार, खग न्यारे
पनिहारिन परदेसी की रसभरी बतियाँ है
याद - एक खेत है
गंध सौंधी, उपजाऊ, बीज पुष्ट, अथक बाहू
मनबोधी हल-बैल, लचीली-सी बेंत है
गाँव रहे, न रहे
नदिया रहे, न रहे
खेत रहे, न रहे
याद बस बनी रहे।


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