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04.28.2007
 
ठण्डे लोग
जयप्रकाश मानस

जो नहीं उठाते जोखिम
जो खड़े नहीं होते तनकर
जो कह नहीं पाते बेलाग बात
जो नहीं बचा पाते धूप-छाँह
यदि तटस्थता यही है
तो सर्वाधिक खतरा
तटस्थ लोगों से है

तटस्थ उपाय नहीं ढूँढते
नहीं करते निर्णय
न ही करते कोई विचार

उपाय, निर्णय या विचार
इनके बस का नहीं
ऐसे ही शून्यकाल में
तटस्थ हो जाते हैं कितने निर्मम
कितने दुर्दम

दीखते हैं कितने ख़तरनाक
खुद को शरीफ़ बनाए रखने में
पृथ्वी को ज़्यादा दिनों तक
सुरक्षित नहीं रखा जा सकता
कुछ पलों का संग

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