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ISSN 2292-9754

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12.24.2015


निहायत छोटा आदमी

उतना दुखी नहीं होता
निहायत छोटा आदमी
जितना दिखता है

निहायत छोटा आदमी
छोटी-छोटी चीज़ों से सँभाल लेता है ज़िंदगी
नाक फटने पर मिल भर जाये गोबर
बुखार में तुलसी डली चाय
मधुमक्खी काटने पर हल्दी

जितना दिखता है
उतना काईयाँ नहीं होता
निहायत छोटा आदमी

निहायत छोटा आदमी
नयी सब्जी का स्वाद पड़ोस बाँट आता है
उठ खड़ा होता है मामूली हाँक पर
औरों के बोल पर जी भर के नाचता

जितना दिखता है
उतना पिछड़ा नहीं होता
निहायत छोटा आदमी

निहायत छोटा आदमी
सिरहाने रखता है पुरखों का इतिहास
बूझता है अपना सारा भूगोल
पत्ती पर ओस, जंगल के रास्ते, चिड़ियों का दर्द
पढ़े बग़ैर बड़ी-बड़ी पोथी


जितना दिखता है
उतना छोटा नहीं होता
निहायत छोटा आदमी


निहायत छोटा आदमी
लहुलूहान पाँवों से भी नाप लेता है अपना रास्ता
निहायत छोटा आदमी के निहायत छोटे होते हैं पाँव
पर डग भरता है बड़े बड़े


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