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ISSN 2292-9754

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01.31.2016


मियाँ बताओ

रज्जब चचा के पास जब भी
गया मैं कुछ सिलाने
लेकर फटे-पुराने
ले जाते गुमटी पर पहले अदरखी-चाय पिलाने
इसके बाद कहते -

मियाँ, बताओ
रंग-बिरंगे पहन कोई
दिखे न सुंदर रत्ती भर, चले न क्यों कुछ आगे
मुझसे रोज़ झगड़ते रहते, चुपचाप ये सुई-धागे?


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