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ISSN 2292-9754

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12.24.2015


मैं आपके प्रिय पेड़ का फूल

खिल ही उठूँगा काँटों की हर ख़िसियाहट के बाद
भर दूँगा अपनी चमक से
तुम्हारा ही पास-पड़ोस
मैं आपके प्रिय पेड़ का फूल

महकूँगा
तेंदूपत्ता तोड़ने जानेवाली
जवान लड़कियों के पसीने के संग-संग
फबूँगा ख़ूब प्रेमी की पुतलियों में
सारी-सारी रात मुरझायी नींदों में
जैसे नदी में बहते दोने पर दीये

जितनी भी साँसें हों
हँसने-हँसाने की बातें हों
दिखूँ नहीं कभी आकाश के पाँव में
झरूँ तो सिर्फ़ माटी के गाँव में
खाद बनकर गहरे उतरता जाऊँगा
बैठा रहूँगा - किसी नये फूल के इंतज़ार में


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