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ISSN 2292-9754

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12.24.2015


गाना ही गाते रहेंगे
(लोककथा की याद)

नदी किनारे - गाती-गुनगुनाती
चिड़िया एक हों आप
दिखे एकाएक - चीटीं एक आकुल-व्याकुल
धार हो इतनी बेमुरोव्वत कि
चींटी हो जाय बार-बार असहाय
ऐसे में गाना ही गाते रहेंगे
या छोटी-सी डाल तोड़कर गिरायेंगे?


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