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03.02.2012
 

प्रकाश
जसबीर कालरवि


जब प्रकाश होता हि
ब्रह्माण्ड एक अणु की तरह
चेतना में आ लटकता है
मनुष्य जो छोटी सी धरती पर
एक विशाल प्राणी है
अहंकार शून्य हो जाता है
और आकाश-गंगा के व्यास पे
चलता चलता
कहीं आगे निकल जाता है
जब प्रकाश होता है
तो बहुत कु
सव्य
- विरोधी होता है।


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