प्रकाश जसबीर कालरवि
जब प्रकाश होता हि ब्रह्माण्ड एक अणु की तरह चेतना में आ लटकता है मनुष्य जो छोटी सी धरती पर एक विशाल प्राणी है अहंकार शून्य हो जाता है और आकाश-गंगा के व्यास पे चलता चलता कहीं आगे निकल जाता है जब प्रकाश होता है तो बहुत कुछ सव्य - विरोधी होता है।