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07.10.2008
 

कितना
(कुछ न कुछ टकराएगा ज़रूर)
इन्दु जैन
प्रेषक : रेखा सेठी


कितना वक़्त लेगी वह
ग़लती जानने में
फिर कितना मानने में?

और और कितना
अपने हाथ से अपना ही दूसरा थामने में?


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