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04.16.2012

कविता की सरिता बहने दे

मत बाँध,
तोड़ शब्दों के बाँध,
कविता की सरिता बहने दे।

इमली सी खट्टी - मीठी हो,
छोटी मिर्ची सी तीखी हो,
रसभरी कभी नमकीन कहानी कहने दे
कविता की सरिता बहने दे l

चाहे न हो अमृत की धार,
पर सावन की मस्त फुहार बने,
भीगे अन्तःस्थल कोने - कोने तक,
खिल उठे पोर-पोर जीवन का,
मदमाती मेहा बरसने दे
कविता की सरिता बहने देl

माँ की मखमली गोद जैसी,
बहना की रंगीली राखी सी,
मुन्ना भैया के तुतले बोल,
बाबुल की स्नेहमयी अखियों से
आशीषों की लड़ियाँ छलकने दे,
कविता की सरिता बहने दे l

देशप्रेम की लहरें झिलमिल
निःशब्द शान्त, कभी हो हलचल,
जनता का दुख बन अपना दुख
इन आँखों से अविरत झरने दे,
मत बाँध, तोड़ शब्दों के बाँध
कविता की सरिता बहने दे
कविता की सरिता बहने दे l


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