अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख पृष्ठ
04.15.2012

नज़रिया

सुन्दरता चेहरे पे नहीं,
दिल में नज़र आती है ।
हजारों के समूह में प्रियतमा,
प्रियतम को ही नजर आती है ।
मानवता कहने में नहीं,
कर-गुजरने में नजर आती है ।
दोस्ती दोस्तों की संख्या में नहीं,
एक सच्चे दोस्त में नजर आती है ।
कविता की गहराई शब्दों में नहीं,
लिखने वाले के भाव में नजर आती है ।
बड़ी सी कविता क्यूँ लिखूँ ,
मेरी बात मेरी सखी यूँ ही समझ जाती है।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें