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08.05.2007
 
एक नया विश्वास
इन्दिरा वर्मा

आज मेरी लेखनी में ज्वार आया.
रक्त का संचार आया।
शब्द जो सहमे पड़े थे कटघरों में
सो गये थे भाव जो एक सघन वन में
घुमड़ कर जल-थल गगन में
खो गये थे, एक नया उद्‌गार आया
लेखनी में ज्वार आया।

सिसकियाँ जो डूबने से बच गई थीं
कर रही उपहास मेरे आँसुओं का
कह रही क्यों आपदाओं से डरे तुम
क्यों नहीं झंझोर डाला आँधियों को,
यह सुना तो मैंने, साधा - सिर उठाया
और नया विश्वास आया,
लेखनी में ज्वार आया।

प्रात का आह्वान, किरणों की चमक से
जगमगाते और महकते पुष्प दल से
दिव्य प्रतिमा ने रंगा मेरे हृदय को
दूर कर तम विरह का, मनमीत पाया
लेखनी में ज्वार आया-
रक्त का संचार आया।


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