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05.31.2008
 
कोशिश
डॉ. हृदय नारायण उपाध्याय

मेरी कोशिश है -
शब्द अब नए अर्थों से सँवर जायें
लोग विध्वंस, चीख, धोखा और विवशता के अर्थ भूलकर
निर्माण, हँसी, विश्वास और सहजता की चर्चा करें।

मेरी कोशिश है -
लोगों के मुख से आशीषों के शब्द निकलें
कबीर का जीवन जीकर लोग मीरा सा प्रेम करें।

मेरी कोशिश हैं -
बची रहे झरनों की शीतलता और नदियों की लहरें
शिशुओं की किलकन और गायों के मधुबन।

मेरी कोशिश है -
लोगों में ईसा जैसा सेवा का भाव हो
बदले में चाहे सलीबों की राह हो
हर एक कदम पर मानवता की जीत हो
होंठों पर सबके जीवन के गीत हों।


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