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06.01.2007
 
मैं तुम्हें क्या दूँ?
हेमेन्द्र जर्मा

मैं तुम्हें क्या दूँ?
हर्षित फूलों में
तुम्हारा रूप है, और
भावों - अभिभावों में
तुम्हारा स्वरूप है
तुम्हारे ख्यालों में
डूबे मेरे गीत हैं
और
गीतों में परिलक्षित
तुम्हारा अहसास
जैसे दरख्तों के साये में
पनाह कोयल की मुस्कान
तुम सिंदूरी शाम में हों
और सुनहरी सुबह में
तुम्हें मैं क्या दूँ?

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