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02.26.2014
 

रास्ता किस जगह नहीं होता
हस्तीमल ’हस्ती’


रास्ता किस जगह नहीं होता
सिर्फ़ हमको पता नहीं होता

बरसों रुत के मि़जा़ज सहता है
पेड़ यूं ही बडा़ नहीं होता

छोड़ दें रास्ता ही डर के हम
ये कोई रास्ता नहीं होता

एक नाटक है जिन्दगी यारों
कौन बहरुपिया नहीं होता

खौफ़ राहों से किस लिये ‘हस्ती’
हादसा घर में क्या नहीं होता

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