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02.26.2014
 

हँसती गाती तबीयत रखिये
हस्तीमल ’हस्ती’


हँसती गाती तबीयत रखिये
बच्चों वाली आदत रखिये

शोला, शबनम, शीशे जैसी
अपनी कोई फितरत रखिये

हँसी, शरारत, बेपरवाही
इनमें अपनी रंगत रखिये

छेड़ - छाड़, आवारागर्दी
करने को भी फुरसत रखिये

भरे-भरे मानी की खा़तिर
कभी-कभी कोरा ख़त रखिये

काम के इसां हो जाओगे
हम जैसों की सोहबत रखिये

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