हस्तीमल ’हस्ती’


दीवान

ग़म नहीं हो तो ज़िंदगी ...
चिराग हो के न हो दिल...
टूट जाने तलक गिरा मुझको
प्यार में उनसे करूँ शिकायत..
मुहब्बत का ही इक मोहरा ...
सबकी सुनना, अपनी करना
साया बनकर साथ चलेंगे...
सिर्फ ख़यालों में न रहा कर
हम ले के अपना माल जो..
हर कोई कह रहा है ...