अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
 सोना और काम
हरि जोशी

जीवन में काम काम, संग में सोना सोना,
धरती पर सुख ही सुख ,फिर दुख को क्यों ढोना ।
सोना और काम बस दोनों ज़रूरी,
बिना इनके ज़िन्दगी शायद अधूरी।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें