अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
मुख्य पृष्ठ
08.11.2007
सफलता पूर्वक जीने की शर्त
हरि जोशी
स्वयं के सफलता पूर्वक
जीने की शर्त,
सामने वाले को दिखाते रहो,
उसका गंतव्य गर्त ।
अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें