अनहद गुंजन "गूँज"

कविता
कुण्डलिया छंद -
काया क्षणभंगुर सुनो
चंचल चितवन...
तीखी वाणी बोलते
द्वारे बैठी राधिका
नर्म कली बेटियाँ
बतलाते गुरु राम को
शिव आराधना
समीक्षा
चाँद मुट्ठी में कर ले -  समोद सिंह चरौरा