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ISSN 2292-9754

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06.04.2016


मेरे हालात न जाने कब

मेरे हालात न जाने कब बदल गए यारो।
हमसफ़र मुझ से आगे निकल गए यारो।

जो कभी वादा निभाने की बात करते थे
वक़्त की मार से वे भी बदल गए यारो।

मिज़ाजे-मौसम जानते हैं खूब दरख़्त ये
आँधियाँ आने से पहले ही सँभल गए यारो।

न ख़ुलूस, न मुहब्बत, फ़क़त बस रिश्ते थे,
वक़्त की आँच से वे भी पिघल गए यारो।

क्यूँ मुझे नींद से जगाया, मुझे सोने देते
मेरी आँखों से कई ख़्वाब फिसल गए यारो।


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