डॉ.गिरिराजशरण अग्रवाल


व्यंग्य

चंगेरीलाल का हस्ताक्षर ज्ञान
तुर्रम खाँ नहीं रहे
हल्ला बोल पार्टी का चुनाव अभियान

शायरी

पिघलकर पर्वतों से हमने
धूप बनकर फैल जाओ
इसे रोशनी दे, उसे रोशनी दे
किसने सोचा धूपबत्ती राख..