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12.23.2008
 
रेखाएँ
डा. गुलाम मुर्तज़ा शरीफ़

आने वाला हर आगंतुक,
साथ अपने लाता है,
उम्र भर का धन, राशन!
और उसे वह अवश्य
प्राप्त होता है!!

अब यह उस पर,
निर्भर है,
चाहे तो उचित मार्ग से,
चाहे तो अनुचित मार्ग से,
प्राप्त करे!!

निर्धारित राशि से,
न कम मिलेगा,
न अधिक!
फिर क्यूँ अनुचित मार्ग का
चयन करें?
निंदा का पात्र बनें??

हाथ की रेखाएँ तो,
मिटती-बनती रहती हैं!!
फिर उनका क्या होगा?
जिनकी रेखाएँ कम होती हैं
या नहीं होतीं??

रब के नेक बंदे,
रेखाएँ बदल देते हैं!!
फिर तुम नेक
क्यूँ नहीं बनते!!


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