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08.21.2007
 
अंग्रेज़ भोजन माँगेगा
डा. गुलाम मुर्तज़ा शरीफ़

हिन्दी हमारी भाषा है,
यही हमारी आशा है,
यदी सच्ची सेवा करना है,
यदी सच्चा सेवक बनना है,
तो तोड़ फोड़ का त्याग करो
दूसरी भाषाओं का सत्कार करो
अंग्रेजी़ के "साइन बोर्ड" पर-
स्याही फेरने से कुछ ना मिलेगा!
मातृ भाषा पर कलंक लगेगा!
क्या किसी अंग्रेज़ ने कहा कि-
अंग्रेज़ी बोलो?

परंतु तुम बोलते हो!
मजबूर हो, बोलने पर!
इस मजबूरी का बहिष्कार करो,
हिन्दी का विस्तार करो
नये नये अविष्कार करो
फिर वह दिन भी आ जायेगा
अंग्रेज़ "फूड" नही-
भोजन माँगेगा!!


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