| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 08.21.2007 |
| मेरा देश महान डा. गुलाम मुर्तज़ा शरीफ़ |
|
मेरा देश महान रे साथी, मेरा देश महान! जाति-पाति के भेदभाव से, हमें है बचकर चलना, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, सबको एक समझना, प्यारी माता, धरती माता, हम तुझ पर बलिदान, मेरा देश महान रे साथी, मेरा देश महान! भरा स्वच्छ पानी नदियों में, जीवन का उल्हास लिए, चहक-चहक कर गाते पक्षी, रंगों की बौछार लिए, नन्हीं नन्हीं बूँदों से, भरते हैं खेत खलिहान। मेरा देश महान रे साथी, मेरा देश महान! सीमा पर हैं खड़े बहादुर, सीना अपना ताने, चोके पर रहती हैं बहनें, पुष्ट हमें बनाने, खेतों पर हल-बैल लिए, खड़ा है मस्त किसान। मेरा देश महान रे साथी, मेरा देश महान! |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|