डॉ. गुलाम मुर्त्तज़ा शरीफ़


कविता

अंग्रेज़ भोजन माँगेगा
अनुराग
इस पार - उस पार
ताज़ा हवा
मजबूरी
मज़ार
मेरा देश महान
रेखाएँ
सत्यम्‌ शरणम्‌ गच्छामि
हमवतनों से
हे माँ वर दे!

शायरी
परछाइयाँ